प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : दूसरे कार्यकाल के 75 दिनों में ऐतिहासिक कार्य। कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाना सबसे बड़ा फैसला।

Date: 13/08/2019

ग्लोबल ख़बर globalkhabar.com

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल को अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए है कि उनकी सरकार द्धारा लिये गये दो निर्णय सुर्खियों में है 1. तीन तलाक पर कानून बनाना और 2. जम्मू कश्मीर से संबंधित आर्टिकल 370 को हटाना। और राज्य को विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश का गठन करना। आर्टिकल 370 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ हो रही है। वे लोग भी तारीफ कर रहे हैं जो बीजेपी के विचारधारा से सहमत नहीं है। न्यूज ऐजेंसी आईएएनएस (IANS) को दिये एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि आर्टिकल जम्मू-कश्मीर से जुड़े आर्टिकल 370 से बड़ा कोई फैसला नहीं हो सकता। 

मोदी सरकार-2 के अभी 75 दिन हुए हैं। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने इंटरव्यू देकर एक तरह से अपनी रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखी है जो निम्नलिखित है -  

1.  देश के लोग चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो उन्होंने जम्मू-कश्मीर से संबंधित जो कदम उठाये गये हैं उनका समर्थन किया है। यह पूरी तरह देश का मामला है कोई राजनीति नहीं। कई लोग आर्टिकल 370 से संबंधित फैसले को मुश्किल मान रहे हैं लेकिन उन्हें इस बात का भी विश्वास हो रहा है कि जो कार्य पहले असंभव लगता था वह अब संभव हो रहा है। 

2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाना उनकी सरकार का सबसे बड़ा फैसला है। इससे बड़ा कोई फैसला नहीं हो सकता। 

3. हमारा दूसरा कार्यकाल स्पष्ट नीति और सही दिशा का परिणाम है। सरकार के 75 दिनों में ही महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। 17वीं लोकसभा के प्रथम सत्र में रिकॉर्ड कार्य हुए, 1952 से लेकर आजतक : चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, मुस्लिम महिलाओं को तीन-तलाक जैसी बुराई से मुक्ति दिलाना, किसानों व व्यापारियों को लिये पेंशन योजना, मेडिकल सेक्टर का रिफॉर्म, श्रम सुधार...जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधान को खत्म करना। चुनाव में जनता का जबरदस्त समर्थन मिलने से फैसले लने में आसानी हो रही है।

4.  कश्मीर में हालात धीरे धीरे सामान्य हो जाएंगे। आर्टिकल 370 से सिर्फ राजनीतिक परिवारों और अलगाववादियों को मदद मिलती थी।अब यह सबको स्पष्ट है कि कैसे आर्टिकल 370 और 35ए ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-थलग कर दिया था। 70 सालों में यहां के लोगो का कोई भला नहीं हुआ। लोगों को विकास की धारा से अलग रखा गया। सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ कि आर्थिक तौर पर जम्मू-कश्मीर कभी तरक्की नहीं कर पाया।

5. हमारा नजरिया थोड़ा अलग है। अब तक गरीबी की मार झेल रहे लोगों को ज्यादा आर्थिक मौके मिलने चाहिए। अब कश्मीर में विकास को एक मौका मिलना चाहिए। मेरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के भाई-बहन अपने लिए बेहतर भविष्य चाहते हैं, लेकिन अनुच्छेद 370 ऐसा नहीं होने दे रहा था। वहां महिलाओं, बच्चों, एससी और एसटी समुदाय के लोगों के खिलाफ काफी अन्याय था। 

6. अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बीपीओ से लेकर स्टार्टअप तक, खाद्य प्रसंस्करण से लेकर पर्यटन तक, कई उद्योग निवेश का लाभ उठा सकते हैं और स्थानीय युवाओं के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं। शिक्षा और स्किल डिवेलपमेंट के क्षेत्र में भी उछाल आएगा।

7. कश्मीर ने इससे पहले लोकतंत्र के पक्ष में ऐसी मजबूत प्रतिबद्धता कभी नहीं देखी है। आप पंचायत चुनाव के दौरान लोगों से मिले समर्थन को याद करें। लोगों ने बड़ी संख्या में निकलकर वोट किया था। किसी के रोकने पर भी वे नहीं रुके नवंबर और दिसंबर 2018 में वहां 35,000 सरपंच चुनकर आए हैं और पंचायत चुनाव में 74 प्रतिशत लोगों ने वोट किया है। आप सोचिए कि जो अब तक सत्ता में थे उन्होंने पंचायतों को मजबूत करने के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठाया? 

8. जम्मू-कश्मीर में एक भी जगह से हिंसा की खबर नहीं है। 

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने कहा कि जो लोग आर्टिकल 370 हटाने का विरोध कर रहे हैं, मेरा उनसे सीधा सवाल है कि आर्टिकल 370 और 35ए को बनाए रखने के पीछे उनका क्या तर्क है? उन्होंने कहा कि उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं होगा। 

 



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