सादगी के प्रतीक विश्व के प्रतिष्ठित उद्योगपति रतन टाटा को भारत-रत्न कब तक!

Date: 19/05/2022

विश्व के जानेमाने प्रतिष्ठित भारतीय उद्योगपति रतन टाटा सादगी के प्रतीक हैं। एक बार फिर वे सुर्खियों में हैं। 18 मई को वे टाटा-नैनो (TATA NANO)से मुंबई ताज होटल पहुंचे बिना सुरक्षा कर्मियों के। इस कार को ड्राइव कर रहे थे उनके डिप्टी जनरल मैनेजर शांतनु नायडु। उनकी सादगी देखते हीं बनती है। वे करोड़ों भारतीयों के प्रेरणा स्त्रोत हैं। टाटा नैनो अब अस्तित्व में नहीं है। उनकी कोशिश थी कि आम भारतीय परिवार के साथ चार चक्के वाली गाड़ी में चले ताकि मोटरसाइकिल जैसी दिक्कतें न हो और कीमत एक लाख रूपये हो। लेकिन कई कारणों की वजह से अब यह अस्तित्व में नही है । अब इसके इलेक्ट्रिक वेरिएंट की चर्चा हो रही है।

 टाटा अपने लाभ का 50 प्रतिशत से अधिक रूपये समाज सेवा में लगाता है जैसे मरीजों के लिये हॉस्पिटल स्थापित करना जहां गरीब आदमी भी गंभीर बीमारियों का इलाज कर सके। शुरूआती दौर में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज भारत में होता ही नही था लोगों को लंदन -अमेरिका जाना पड़ता था लेकिन टाटा ग्रूप ने मुंबई में हॉस्पिटल स्थापित कर यही इलाज की व्यवस्था की। गरीब व्यक्ति भी इलाज कराने लगे। गरीब मरीजों को अपने ट्रस्ट से इलाज के पैसे भी देते थे। यह तो उदाहरण मात्र है। 

जमशेदपुर में टाटा स्टील की स्थापना जमशेदजी टाटा ने वर्ष 1907 में की। आज यह कंपनी पूरी दुनियां में छाई हुई है। साथ हीं देश का नाम भी पूरी दुनियां में रोशन किया टाटा ने खासकर व्यापार जगत के क्षेत्र में। जिस समय टाटा कंपनी की स्थापना की गई थी उस समय देश में अंग्रेजों का शासन था। व्यापार करना उनके लिये उतना आसान नहीं था जितना आज है पर उन्होंने हर समस्याओं का सामना किया। इतना हीं नहीं वे स्वतंत्रता सेनानियों की भी मदद करते रहे। जमशेदजी टाटा के छोटे पुत्र सर रतनजी जमशेदजी नुसुरवनजी टाटा ने 1910 में बापू को रंगभेदी नीति के खिलाफ चलाये जा रहे आंदोलन के लिये सवा लाख रुपये दिये थे।उनकी सोच मानवीय और विश्वव्यापी थी।

जमशेदजी ने जब टाटा समूह का गठन किया था तभी उन्होंने अपनी कंपनी के बारे में एक ऐसा मॉडल तैयार कर लिया था जो मानवीय और विश्वस्तरीय हो।उन्होंने अपने कर्मचारियों के लिये 8 घंटे की शिफ्ट तय की। ऐसा देश में पहली बार हुआ था। वर्तमान में टाटा समूह के पास 96 कंपनियां हैं और टाटा स्टील उन्हीं कंपनियों में से एक है।  विश्वस्तरीय स्टील,चाय,वाहन(ट्रक,बस,कारे) बनाने के अलावा टाटा समूह ने फॉन कॉल के लिये समुद्र के नीचे फ़ाइबर ऑप्टिक केबल भी बिछाये। ये काम आसान नहीं था। तकनीकी संचार के क्षेत्र में टाटा समूह ने 50साल पहले ही क्रांति कर दी थी।

टाटा समूह ने अपनी कंपनी को एक ऐसे ब्रांड में बदल दिया है जिसपर देश के लोग आंख मुंद कर विश्वास करते है। अपनी ठोस नीति और विश्वास के कारण हीं टाटा समूह ने अपनी कंपनी को विश्व भर में फैला दिया। 

आज रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ग्रूप लगातार अग्रसर है। देश की अधिकांश जनता की यही मांग है कि रतना टाटा को भारत रत्न से सम्मानित किया जाये। 

 



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